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तलाक के बाद भी पत्नी को मिलेगा भरण-पोषण: सुप्रीम कोर्ट ने कहा – ‘अविवाहित पत्नी उसी जीवन स्तर की हकदार’

नई दिल्ली। तलाक के बाद भरण-पोषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि तलाकशुदा पत्नी ने दोबारा विवाह नहीं किया है और वह अब भी अविवाहित है, तो उसे अपने पूर्व पति से भरण-पोषण का अधिकार प्राप्त रहेगा। यह फैसला राखी साधुखान बनाम उनके पूर्व पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया गया।

 जीवन स्तर को बनाए रखने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की डिवीजन बेंच ने कहा कि महिला को वही जीवन स्तर मिलना चाहिए जो उसने विवाह के दौरान अनुभव किया था। इस आधार पर कोर्ट ने स्थायी गुजारा भत्ता को बढ़ाकर 50,000 रुपये प्रति माह कर दिया है। यह पहले 20,000 रुपये प्रतिमाह था, जिसे कोलकाता हाईकोर्ट ने तय किया था।

 मामले की पृष्ठभूमि

राखी साधुखान का विवाह वर्ष 1997 में हुआ था।

1998 में दंपती को एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।

वर्ष 2008 में दोनों अलग हो गए।

मानसिक क्रूरता के आधार पर कोलकाता हाई कोर्ट ने तलाक मंजूर कर लिया था।

हाईकोर्ट ने महिला को 20,000 रुपये मासिक भत्ता निर्धारित किया था, जिसमें हर तीन साल में 5% की वृद्धि का भी प्रावधान था। परंतु महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा कि यह राशि अपर्याप्त है, क्योंकि पति की मासिक आय 1.5 लाख रुपये से अधिक है और वह एक बड़े व्यवसाय का मालिक है।

 पति का पक्ष

पति की ओर से यह दलील दी गई कि उसकी दूसरी पत्नी, आश्रित परिवार और वृद्ध माता-पिता की जिम्मेदारी उसी पर है। साथ ही यह भी कहा गया कि उनका पुत्र अब 26 वर्ष का है, मां के साथ ही रहता है और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है।

कोर्ट का स्पष्ट संदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पति की इन दलीलों को नकारते हुए कहा कि पत्नी अब भी अविवाहित है और विवाह के दौरान जैसे जीवन स्तर पर थी, वैसे ही जीवन स्तर की हकदार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भरण-पोषण सिर्फ भोजन या न्यूनतम ज़रूरतें नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार भी है।

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